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सुनन नसाई

नंबर 2979

नंबर 2979किताब 24, नंबर 362
أَخْبَرَنَا أَبُو عَمَّارٍ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ إِنَّمَا سَعَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ لِيُرِيَ الْمُشْرِكِينَ قُوَّتَهُ ‏.‏
It was narrated that Ibn Abbas said:"The Prophet walked rapidly betwwne As-Safa and Al-Marwah to show the idolaters that he was strong
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।