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सुनन नसाई

नंबर 2978

नंबर 2978किताब 24, नंबर 361
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ يَسَارٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ سَأَلُوا ابْنَ عُمَرَ هَلْ رَأَيْتَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَمَلَ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ فَقَالَ كَانَ فِي جَمَاعَةٍ مِنَ النَّاسِ فَرَمَلُوا فَلاَ أُرَاهُمْ رَمَلُوا إِلاَّ بِرَمَلِهِ ‏.‏
It was narrated that Az-Zubair said:"They asked Ibn Umar: 'Did you see the Messenger of Allah walk rapidly between As-Safa and Al-Marwah?' He said: 'He was among a group of people and they walked rapidly, and I think they went at the same pace as him.'" (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAbu Ghuddah
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।