सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2977

नंबर 2977किताब 24, नंबर 360
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ أَنْبَأَنَا الثَّوْرِيُّ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ الْجَزَرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، قَالَ رَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ وَذَكَرَ نَحْوَهُ إِلاَّ أَنَّهُ قَالَ وَأَنَا شَيْخٌ، كَبِيرٌ ‏.‏
It was narrated that Saeed bin Jubair said:"I saw Ibn Umar and he mentioned something similar, except he said: "and I am an old man
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।