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सुनन नसाई

नंबर 2976

नंबर 2976किताब 24, नंबर 359
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ جُمْهَانَ، قَالَ رَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ يَمْشِي بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ فَقَالَ إِنْ أَمْشِي فَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَمْشِي وَإِنْ أَسْعَى فَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَسْعَى ‏.‏
It was narrated that Kathir bin Jumhan said:"I saw Ibn Umar walking between As-Safa and Al-Marwah. He said: 'I am walking because I saw the Messenger of Allah Walking, and I hasten because I saw the Messenger of Allah hasten
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।