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सुनन नसाई

नंबर 2942

नंबर 2942किताब 24, नंबर 325
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرٍو، وَسُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ يَقْدَمُ مَكَّةَ يَسْتَلِمُ الرُّكْنَ الأَسْوَدَ أَوَّلَ مَا يَطُوفُ يَخُبُّ ثَلاَثَةَ أَطْوَافٍ مِنَ السَّبْعِ ‏.‏
It was narrated from Salim that his father said:"When the Messenger of Allah came to Makkah, he touched the Black Stone and at the beginning of his Tawaf, he walked rapidly in (the first) three of the seven rounds
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • -Abu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।