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सुनन नसाई

नंबर 2943

नंबर 2943किताब 24, नंबर 326
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدٌ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ، ابْنَا عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ قَالاَ حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ اللَّيْثِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ فَرْقَدٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، كَانَ يَخُبُّ فِي طَوَافِهِ حِينَ يَقْدَمُ فِي حَجٍّ أَوْ عُمْرَةٍ ثَلاَثًا وَيَمْشِي أَرْبَعًا قَالَ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَفْعَلُ ذَلِكَ ‏.‏
It was narrated from Nafi' that:Abdullah bin Umar used to walk rapidly in three rounds of his Tawaf when he came for Hajj or Umrah, and walk (at a normal pace) in four. He said: "The Messenger of Allah used to do that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।