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सुनन नसाई

नंबर 2941

नंबर 2941किताब 24, नंबर 324
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا طَافَ فِي الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ أَوَّلَ مَا يَقْدَمُ فَإِنَّهُ يَسْعَى ثَلاَثَةَ أَطْوَافٍ وَيَمْشِي أَرْبَعًا ثُمَّ يُصَلِّي سَجْدَتَيْنِ ثُمَّ يَطُوفُ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ ‏.‏
It was narrated from Ibn Umar, that:when the Messenger of Allah performed Tawaf in Hajj and Umarah- as he first arrived (in Makkah), he would hasten in three rounds, and walk (at a regular pace) in four. Then he prayed two Rakahs, then he performed sai between As-Safa and Al-Marwah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।