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सुनन नसाई

नंबर 2821.2

नंबर 2821.2किताब 24, नंबर 204
أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ سَمِعْتُ يَحْيَى، وَسَمِعْتُ أَبَا عَاصِمٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَسَنُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَدِمَ زَيْدُ بْنُ أَرْقَمَ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ يَسْتَذْكِرُهُ كَيْفَ أَخْبَرْتَنِي عَنْ لَحْمِ، صَيْدٍ أُهْدِيَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ حَرَامٌ قَالَ نَعَمْ أَهْدَى لَهُ رَجُلٌ عُضْوًا مِنْ لَحْمِ صَيْدٍ فَرَدَّهُ وَقَالَ ‏ "‏ إِنَّا لاَ نَأْكُلُ إِنَّا حُرُمٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"Zaid bin Arqam came and Ibn Abbas said to him, reminding him: "What did you tell me about the game meat that was given to the Messenger of Allah when he was in Ihram?" He said: "Yes, a man gave him a piece of game meat but he returned it and said: 'We cannot eat it, we are in Ihram

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।