أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنْ عَبْدَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ مَالِكِ بْنِ دِينَارٍ، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ قَالَ سُرَاقَةُ تَمَتَّعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَتَمَتَّعْنَا مَعَهُ فَقُلْنَا أَلَنَا خَاصَّةً أَمْ لأَبَدٍ قَالَ " بَلْ لأَبَدٍ " .
Surqah said:'The Messenger of Allah joined Hajj and Umrah and we did so with him. We said: "Is it just for us, or for all time?" He said: "No, it is for all time
स्रोत में दर्ज दर्जे
Sahih IsnaadAbu Ghuddah
Sahih IsnaadAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।