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सुनन नसाई

नंबर 2806

नंबर 2806किताब 24, नंबर 188
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنْ سُرَاقَةَ بْنِ مَالِكِ بْنِ جُعْشُمٍ، أَنَّهُ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ عُمْرَتَنَا هَذِهِ لِعَامِنَا أَمْ لأَبَدٍ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ هِيَ لأَبَدٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Surqah bin Malik bin Jushum said :"O Messenger of Allah, do you think that this Umrah of ours is for this year only, or for all time?" The Messenger of Allah said: "It is for all time
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।