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सुनन नसाई

नंबर 2808

नंबर 2808किताब 24, नंबर 190
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - وَهُوَ الدَّرَاوَرْدِيُّ - عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنِ الْحَارِثِ بْنِ بِلاَلٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَفَسْخُ الْحَجِّ لَنَا خَاصَّةً أَمْ لِلنَّاسِ عَامَّةً قَالَ ‏ "‏ بَلْ لَنَا خَاصَّةً ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Al-Harith bin Bilal that his father said:"I said: 'O Messenger of Allah, is this annulment of Hajj just for us or is it for all the people?' He said: 'No, it is just for us." (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।