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सुनन नसाई

नंबर 2756

नंबर 2756किताब 24, नंबर 138
أَخْبَرَنِي عِمْرَانُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ أَنْبَأَنَا شُعَيْبٌ، قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ سَمِعْتُ جَعْفَرَ بْنَ مُحَمَّدٍ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرٍ، فِي حَجَّةِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَلَمَّا أَتَى ذَا الْحُلَيْفَةِ صَلَّى وَهُوَ صَامِتٌ حَتَّى أَتَى الْبَيْدَاءَ ‏.‏
It was narrated from Jabir:Concerning the Hajj of the Prophet, that when he came to Dhul-Hulaifah, he prayed and then he remained silent until he came to Al-Baida
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।