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सुनन नसाई

नंबर 2757

नंबर 2757किताब 24, नंबर 139
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ، يَقُولُ بَيْدَاؤُكُمْ هَذِهِ الَّتِي تَكْذِبُونَ فِيهَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا أَهَلَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ مِنْ مَسْجِدِ ذِي الْحُلَيْفَةِ ‏.‏
It was narrated from Salim that he heard his father say:"This baida' of yours where you are telling lies about the Messenger of Allah; the Messenger of Allah never began the Talbiyah except from the Masjid at Dhul-Hulaifah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।