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सुनन नसाई

नंबर 2755

नंबर 2755किताब 24, नंबर 137
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَنْبَأَنَا النَّضْرُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَشْعَثُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الظُّهْرَ بِالْبَيْدَاءِ ثُمَّ رَكِبَ وَصَعِدَ جَبَلَ الْبَيْدَاءِ وَأَهَلَّ بِالْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ حِينَ صَلَّى الظُّهْرَ ‏.‏
It was narrated from Anas:That the Messenger of Allah prayed Zuhr in Al-Baida', then he mounted and rode up the mountain of Al-Baida', and he began the Talbiyah for Hajj and 'Umar when he had prayed Zuhr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।