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सुनन नसाई

नंबर 2688

नंबर 2688किताब 24, नंबर 70
أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ مُحَمَّدٍ أَبُو عُمَيْرٍ، عَنْ ضَمْرَةَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ طَيَّبْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لإِحْلاَلِهِ وَطَيَّبْتُهُ لإِحْرَامِهِ طِيبًا لاَ يُشْبِهُ طِيبَكُمْ هَذَا تَعْنِي لَيْسَ لَهُ بَقَاءٌ ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"I put perfume on the Messenger of Allah for his exiting Ihram, and I put perfume on him for his Ihram, perfume which was not like this perfume of yours" she meant that it does not last.(Shah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।