सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2625

नंबर 2625किताब 24, नंबर 7
أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مَثْرُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ مَخْرَمَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ سُهَيْلَ بْنَ أَبِي صَالِحٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يَقُولُ، سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَفْدُ اللَّهِ ثَلاَثَةٌ الْغَازِي وَالْحَاجُّ وَالْمُعْتَمِرُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah said: 'The guests of Allah are three: The ghazi, the Hajj (pilgrim) and the Mu'tamir
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।