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सुनन नसाई

नंबर 2489

नंबर 2489किताब 23, नंबर 55
أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ سَوَّادِ بْنِ الأَسْوَدِ بْنِ عَمْرٍو، وَأَحْمَدُ بْنُ عَمْرٍو، وَالْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ، قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، أَنَّ أَبَا الزُّبَيْرِ، حَدَّثَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ فِيمَا سَقَتِ السَّمَاءُ وَالأَنْهَارُ وَالْعُيُونُ الْعُشْرُ وَفِيمَا سُقِيَ بِالسَّانِيَةِ نِصْفُ الْعُشْرِ ‏"‏ ‏.‏
Jabir bin 'Abdullah said:"The Messenger of Allah said:'For that which is watered by the sky, rivers and springs, one-tenth. For whatever is irrigated by animals, one-half of one-tenth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।