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सुनन नसाई

नंबर 2488

नंबर 2488किताब 23, नंबर 54
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ الْهَيْثَمِ أَبُو جَعْفَرٍ الأَيْلِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ فِيمَا سَقَتِ السَّمَاءُ وَالأَنْهَارُ وَالْعُيُونُ أَوْ كَانَ بَعْلاً الْعُشْرُ وَمَا سُقِيَ بِالسَّوَانِي وَالنَّضْحِ نِصْفُ الْعُشْرِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Salim, from his father, that the Messenger of Allah said:"For whatever is irrigated by the sky, rivers and springs, or draws up water from deep roots, one-tenth. For whatever is irrigated by animals and artificial means, one half of one-tenth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।