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सुनन नसाई

नंबर 2490

नंबर 2490किताब 23, नंबर 56
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنْ أَبِي بَكْرٍ، - وَهُوَ ابْنُ عَيَّاشٍ - عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ مُعَاذٍ، قَالَ بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلَى الْيَمَنِ فَأَمَرَنِي أَنْ آخُذَ مِمَّا سَقَتِ السَّمَاءُ الْعُشْرَ وَفِيمَا سُقِيَ بِالدَّوَالِي نِصْفَ الْعُشْرِ ‏.‏
It was narrated that Mu'adh said:"The Messenger of Allah sent me to Yemen and he commanded me to take one-tenth of whatever is irrigated by the sky, and half of one-tenth of whatever is irrigated by means of buckets
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।