أَخْبَرَنَا الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ دِينَارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ حَفْصَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَخَذَ مَضْجَعَهُ جَعَلَ كَفَّهُ الْيُمْنَى تَحْتَ خَدِّهِ الأَيْمَنِ وَكَانَ يَصُومُ الاِثْنَيْنَ وَالْخَمِيسَ .
It was narrated that Hafsah said:"When the Messenger of Allah would lie down, he would place his right hand under his right cheek, and he used to fast on Mondays and Thursday
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan SahihAbu Ghuddah
Hasan SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।