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सुनन नसाई

नंबर 2016

नंबर 2016किताब 21, नंबर 199
أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامِ بْنِ عَامِرٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ ‏:‏ اشْتَدَّ الْجِرَاحُ يَوْمَ أُحُدٍ فَشُكِيَ ذَلِكَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏:‏ ‏ "‏ احْفِرُوا وَأَوْسِعُوا وَأَحْسِنُوا، وَادْفِنُوا فِي الْقَبْرِ الاِثْنَيْنِ وَالثَّلاَثَةَ، وَقَدِّمُوا أَكْثَرَهُمْ قُرْآنًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Sa'd bin Hisham bin 'Amir that his father said:"Many people were wounded on the day of Uhud and complaints were made to the Messenger of Allah about that. He said: 'Dig graves and make them good and wide, and bury two or three in a grave, and put in first the one who knew the Qur'an most
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।