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सुनन नसाई

नंबर 2015

नंबर 2015किताब 21, नंबर 198
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ ‏:‏ لَمَّا كَانَ يَوْمُ أُحُدٍ أَصَابَ النَّاسَ جَهْدٌ شَدِيدٌ، فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏:‏ ‏"‏ احْفِرُوا وَأَوْسِعُوا، وَادْفِنُوا الاِثْنَيْنِ وَالثَّلاَثَةَ فِي قَبْرٍ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالُوا ‏:‏ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَنْ نُقَدِّمُ قَالَ ‏:‏ ‏"‏ قَدِّمُوا أَكْثَرَهُمْ قُرْآنًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Hisham bin 'Amir said:"On the day of Uhud the people were exhausted. The Prophet said: 'Dig graves and make them wide, and bury two or three in a grave.' They said: 'O Messenger of Allah, who should we 'put in first? He said: 'Put in first the one who knew the Qur'an most
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।