أَخْبَرَنَا إِسْحَاق�� بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، وَقُتَيْبَةُ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا يَمْشُونَ أَمَامَ الْجَنَازَةِ .
It was narrated from Salim:That his father saw the Messenger of Allah, Abu Bakr and 'Umar, may Allah be pleased with them, walking in front of the Janazah
स्रोत में दर्ज दर्जे
-Abu Ghuddah
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।