सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1924

नंबर 1924किताब 21, नंबर 107
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، أَنَّ جَنَازَةً، مَرَّتْ بِالْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ وَابْنِ عَبَّاسٍ فَقَامَ الْحَسَنُ وَلَمْ يَقُمِ ابْنُ عَبَّاسٍ فَقَالَ الْحَسَنُ أَلَيْسَ قَدْ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِجَنَازَةِ يَهُودِيٍّ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ نَعَمْ ثُمَّ جَلَسَ ‏.‏
It was narrated from Muhammad that:a funeral passed by Al-Hasan bin 'Ali and Ibn 'Abbas. Al-Hasan stood up but Ibn 'Abbas did not/ Al-Hasan said: 'Didn't the Messenger of Allah stand up for the funeral of a Jew?' Ibn 'Abbas said: 'Yes, then he sat down
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।