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सुनन नसाई

नंबर 1923

नंबर 1923किताब 21, नंबर 106
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، قَالَ كُنَّا عِنْدَ عَلِيٍّ فَمَرَّتْ جَنَازَةٌ فَقَامُوا لَهَا فَقَالَ عَلِيٌّ مَا هَذَا قَالُوا أَمْرُ أَبِي مُوسَى ‏.‏ فَقَالَ إِنَّمَا قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِجَنَازَةِ يَهُودِيَّةٍ وَلَمْ يَعُدْ بَعْدَ ذَلِكَ ‏.‏
It was narrated that Abu Ma'mar said:"We were with 'Ali and a funeral passed by him, and they stood up for it. 'Ali said: "What is this?' They said: 'The command of Abu Musa.' He said: 'Rather the Messenger of Allah stood up for a Jewish funeral but he did not do it again
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।