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सुनन नसाई

नंबर 1807

नंबर 1807किताब 20, नंबर 210
أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا وَهْبٌ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، ذَكْوَانَ قَالَ حَدَّثَنِي عَنْبَسَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ، أَنَّ أُمَّ حَبِيبَةَ، حَدَّثَتْهُ أَنَّهُ، مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً بُنِيَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ ‏.‏
Anbasah bin Abi Sufyan narrated that:Umm Habibah told him: "Whoever prays twelve rak'ahs, a house will be built for him in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।