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सुनन नसाई

नंबर 1806

नंबर 1806किताब 20, नंबर 209
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَكِّيٍّ، وَحِبَّانُ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ وَلَيْلَةٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً سِوَى الْمَكْتُوبَةِ بَنَى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ ‏.‏ لَمْ يَرْفَعْهُ حُصَيْنٌ وَأَدْخَلَ بَيْنَ عَنْبَسَةَ وَبَيْنَ الْمُسَيَّبِ ذَكْوَانَ ‏.‏
It was narrated that Umm Habibah said:"Whoever prays twelve rak'ahs during the night and day apart from the prescribed prayers, Allah (SWT), the Mighty and Sublime, will build for him a house in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।