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सुनन नसाई

नंबर 1805

नंबर 1805किताब 20, नंबर 208
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنِ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ مَنْ صَلَّى فِي اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً سِوَى الْمَكْتُوبَةِ بُنِيَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ ‏.‏
It was narrated that Umm Habibah said:"Whoever prays twelve rak'ahs during the night and day apart from the prescribed prayers, a house will be built for him in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।