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सुनन नसाई

नंबर 1808

नंबर 1808किताब 20, नंबर 211
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً سِوَى الْفَرِيضَةِ بَنَى اللَّهُ لَهُ أَوْ بُنِيَ لَهُ بَيْتٌ فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Umm Habibah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'Whoever prays twelve rak'ahs in a day apart from the obligatory prayers, Allah (SWT) will build for him, or there will be built for him, a house in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।