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सुनन नसाई

नंबर 1677

नंबर 1677किताब 20, नंबर 80
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ سَلْمٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ الْحَسَنِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنِ النَّضْرِ بْنِ شُمَيْلٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي شِمْرٍ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَوْصَانِي خَلِيلِي صلى الله عليه وسلم بِثَلاَثٍ النَّوْمِ عَلَى وِتْرٍ وَصِيَامِ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ وَرَكْعَتَىِ الضُّحَى ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"My dearest friend advised me (to do) three things: 'To sleep after praying Witr, to fast three days each month, and to pray two rak'ahs of Fajr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।