सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1676

नंबर 1676किताब 20, नंबर 79
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، رضى الله عنه قَالَ الْوِتْرُ لَيْسَ بِحَتْمٍ كَهَيْئَةِ الْمَكْتُوبَةِ وَلَكِنَّهُ سُنَّةٌ سَنَّهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated that Ali, may Allah (SWT) be pleased with him, said:"Witr is not essential like the obligatory prayers, but it is the sunnah of the Messenger of Allah (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।