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सुनन नसाई

नंबर 1675

नंबर 1675किताब 20, नंबर 78
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَيَّاشٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَاصِمٍ، - وَهُوَ ابْنُ ضَمْرَةَ - عَنْ عَلِيٍّ، رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَوْتَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ يَا أَهْلَ الْقُرْآنِ أَوْتِرُوا فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وِتْرٌ يُحِبُّ الْوِتْرَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ali, may Allah (SWT) be pleased with him, said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: "O people of the Qur'an, pray witr, for Allah, the Mighty and Sublime, is Witr (One) and loves Al-Witr (the odd numbered)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।