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सुनन नसाई

नंबर 1678

नंबर 1678किताब 20, नंबर 81
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ثُمَّ ذَكَرَ كَلِمَةً مَعْنَاهَا عَنْ عَبَّاسٍ الْجُرَيْرِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَوْصَانِي خَلِيلِي صلى الله عليه وسلم بِثَلاَثٍ الْوِتْرِ أَوَّلَ اللَّيْلِ وَرَكْعَتَىِ الْفَجْرِ وَصَوْمِ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"My closest friend advised me to do three things: 'To pray witr at the beginning of the night, to pray two rak'ahs of Fajr and to fast three days of each month
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।