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सुनन नसाई

नंबर 1669

नंबर 1669किताब 20, नंबर 72
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَبِيدٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الْمِنْبَرِ يُسْأَلُ عَنْ صَلاَةِ اللَّيْلِ فَقَالَ ‏ "‏ مَثْنَى مَثْنَى فَإِذَا خِفْتَ الصُّبْحَ فَأَوْتِرْ بِرَكْعَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Umar said:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) on the minbar, when he was asked about prayers at night, say: "Two by two, then if you fear that dawn will come, pray witr with one rak'ah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।