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सुनन नसाई

नंबर 1670

नंबर 1670किताब 20, नंबर 73
أَخْبَرَنَا مُوسَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يُونُسَ، قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ الْحُرِّ، قَالَ حَدَّثَنَا نَافِعٌ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، أَخْبَرَهُمْ أَنَّ رَجُلاً سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ صَلاَةِ اللَّيْلِ قَالَ ‏ "‏ مَثْنَى مَثْنَى فَإِنْ خَشِيَ أَحَدُكُمُ الصُّبْحَ فَلْيُوتِرْ بِوَاحِدَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Umar told them that :A man asked the Messenger of Allah (ﷺ)about prayers at night, and he said: "Two by two, then if one of you fears that dawn will come, let him pray witr with one
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।