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सुनन नसाई

नंबर 1667

नंबर 1667किताब 20, नंबर 70
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قُدَامَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ حَبِيبٍ، عَنْ طَاوُسٍ، قَالَ قَالَ ابْنُ عُمَرَ سَأَلَ رَجُلٌ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ صَلاَةِ اللَّيْلِ فَقَالَ ‏ "‏ مَثْنَى مَثْنَى فَإِذَا خَشِيتَ الصُّبْحَ فَوَاحِدَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Tawus said:"Ibn Umar said: "A man asked the Messenger of Allah (ﷺ) about prayer at night. He said: "Two by two, and if you fear that dawn will come, then one
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।