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सुनन नसाई

नंबर 1666

नंबर 1666किताब 20, नंबर 69
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالاَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَلِيًّا الأَزْدِيَّ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ، يُحَدِّثُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ صَلاَةُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ مَثْنَى مَثْنَى ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا الْحَدِيثُ عِنْدِي خَطَأٌ وَاللَّهُ تَعَالَى أَعْلَمُ ‏.‏
It was narrated from Ya'la bin Ata that he heard Ali Al-Azdi (say) that he heard Ibn Umar narrate that:The Prophet (ﷺ) said: "The prayers of the night and day are two by two
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।