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सुनन नसाई

नंबर 1513

नंबर 1513किताब 17, नंबर 10
أَخْبَرَنِي شُعَيْبُ بْنُ يُوسُفَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقَطَّانِ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لاَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ فِي شَىْءٍ مِنَ الدُّعَاءِ إِلاَّ فِي الاِسْتِسْقَاءِ فَإِنَّهُ كَانَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ حَتَّى يُرَى بَيَاضُ إِبْطَيْهِ ‏.‏
It was narrated that Anas said:"The Messenger of Allah (ﷺ) did not raise his hands during any supplication except when praying for rain, when he used to raise his hands so high that the whiteness of his armpits could be seen
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book of Praying for Rain (Al-Istisqa')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।