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सुनन नसाई

नंबर 1514

नंबर 1514किताब 17, नंबर 11
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ خَالِدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِلاَلٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عُمَيْرٍ، مَوْلَى آبِي اللَّحْمِ عَنْ آبِي اللَّحْمِ، أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عِنْدَ أَحْجَارِ الزَّيْتِ يَسْتَسْقِي وَهُوَ مُقْنِعٌ بِكَفَّيْهِ يَدْعُو ‏.‏
It was narrated from Abi Al-Lahm that:He saw the Messenger of Allah at Ahjar Az-Zait praying for rain and raising his hands, making supplications
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book of Praying for Rain (Al-Istisqa')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।