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सुनन नसाई

नंबर 1512

नंबर 1512किताब 17, नंबर 9
أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ أَبُو تَقِيٍّ الْحِمْصِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ، أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الاِسْتِسْقَاءِ اسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ وَقَلَبَ الرِّدَاءَ وَرَفَعَ يَدَيْهِ ‏.‏
It was narrated from 'Abbad bin Tamim, from his paternal uncle, that:He saw the Messenger of Allah (ﷺ), when he prayed for rain, turn to face the Qiblah, turning his cloak around and raising his hands
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book of Praying for Rain (Al-Istisqa')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।