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सुनन नसाई

नंबर 1468

नंबर 1468किताब 16, नंबर 10
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ يَحْيَى، عَنْ سُفْيَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبِيبُ بْنُ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ صَلَّى فِي كُسُوفٍ فَقَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ قَرَأَ ثُمَّ رَكَعَ ثُمَّ سَجَدَ وَالأُخْرَى مِثْلُهَا ‏‏.‏‏
It was narrated from Tawus from Ibn Abbas that:The Prophet (ﷺ) prayed when there was an eclipse. He recited then he bowed, then he recited then he bowed, then he recited then he bowed, then he recited then he bowed, then he prostrated, and he did the second rak'ahs in same fashion
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Eclipses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।