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सुनन नसाई

नंबर 1447

नंबर 1447किताब 15, नंबर 15
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ بُكَيْرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي سُلَيْمٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِنًى وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ رَكْعَتَيْنِ وَمَعَ عُثْمَانَ رَكْعَتَيْنِ صَدْرًا مِنْ إِمَارَتِهِ ‏.‏
It was narrated from Anas bin Malik that he said:"I prayed two rak'ahs with the Messenger of Allah (ﷺ) in Mina, and with Abu Bakr and 'Umar, and two rak'ahs with 'Uthman at the beginning of his Caliphate
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Shortening the Prayer When Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।