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सुनन नसाई

नंबर 1446

नंबर 1446किताब 15, नंबर 14
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، ح وَأَنْبَأَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو إِسْحَاقَ، عَنْ حَارِثَةَ بْنِ وَهْبٍ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِنًى أَكْثَرَ مَا كَانَ النَّاسُ وَآمَنَهُ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated that Harithah bin Wahab said:"The Messenger of Allah (ﷺ) led us in prayer in Mina, two rak'ahs, when the people were greater in number and more secure
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Shortening the Prayer When Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।