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सुनन नसाई

नंबर 970

नंबर 970किताब 11, नंबर 95
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ أَنْبَأَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ فِي كُلِّ صَلاَةٍ قِرَاءَةٌ فَمَا أَسْمَعَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَسْمَعْنَاكُمْ وَمَا أَخْفَاهَا أَخْفَيْنَا مِنْكُمْ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"In every prayer there is recitation. What the Messenger of Allah (ﷺ) made us hear (by reciting out loud) we make you hear, and what he hid from us (by reciting silently) we hide from you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।