أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قُدَامَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ رَقَبَةَ، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ كُلُّ صَلاَةٍ يُقْرَأُ فِيهَا فَمَا أَسْمَعَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَسْمَعْنَاكُمْ وَمَا أَخْفَاهَا أَخْفَيْنَا مِنْكُمْ .
It was narrated that 'Ata said:"Abu Hurairah said: "In should be recitation in every prayer. What the Messenger of Allah (ﷺ) made us hear (by reciting out loud) we make you hear, and what he hid from us (by reciting silently) we hide from you
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।