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सहीह मुस्लिम

नंबर 1990

नंबर 1990किताब 7, नंबर 40अरबी नंबरिंग 858.02
وَحَدَّثَنِي الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، ح وَحَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ، الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَسَّانَ، قَالاَ جَمِيعًا حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ بِلاَلٍ، عَنْ جَعْفَرٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّهُ سَأَلَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ مَتَى كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الْجُمُعَةَ قَالَ كَانَ يُصَلِّي ثُمَّ نَذْهَبُ إِلَى جِمَالِنَا فَنُرِيحُهَا ‏.‏ زَادَ عَبْدُ اللَّهِ فِي حَدِيثِهِ حِينَ تَزُولُ الشَّمْسُ يَعْنِي النَّوَاضِحَ ‏.‏
Ja'far reported on the authority of his father:that he asked Jabir b. 'Abdullah when the Messenger of Allah (ﷺ) observed Jumu'a prayer. He said: He used to observe prayer, and we then went (back) to our camels and gave them rest. 'Abdullah made this addition in his narration: "Till the sun passed the meridian. and the camels used for carrying water (took rest)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।