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सहीह मुस्लिम

नंबर 1989

नंबर 1989किताब 7, नंबर 39अरबी नंबरिंग 858.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى، بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ نَرْجِعُ فَنُرِيحُ نَوَاضِحَنَا ‏.‏ قَالَ حَسَنٌ فَقُلْتُ لِجَعْفَرٍ فِي أَىِّ سَاعَةٍ تِلْكَ قَالَ زَوَالَ الشَّمْسِ ‏.‏
Jabir b. 'Abdullah reported:We used to observe (Jumu'a) prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) and then we returned and gave rest to our camels used for carrying water. Hassan[ (one of the narrators) said: I asked Ja'far what time that was. He said.. It is the time when the sun passes the meridian

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।