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सहीह मुस्लिम

नंबर 1747

नंबर 1747किताब 6, नंबर 176अरबी नंबरिंग 748.02
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ الشَّيْبَانِيُّ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ، قَالَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى أَهْلِ قُبَاءٍ وَهُمْ يُصَلُّونَ فَقَالَ ‏ "‏ صَلاَةُ الأَوَّابِينَ إِذَا رَمِضَتِ الْفِصَالُ ‏"‏ ‏.‏
Zaid b. Arqam reported that the Messenger of Allah (ﷺ) went out to the people of Quba' and saw them observing prayer; upon this he said:The prayer of the penitent should be observed when the young weaned camels feel heat of the sun

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।