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सहीह मुस्लिम

नंबर 1686

नंबर 1686किताब 6, नंबर 116अरबी नंबरिंग 724.06
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عَطَاءٌ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم لَمْ يَكُنْ عَلَى شَىْءٍ مِنَ النَّوَافِلِ أَشَدَّ مُعَاهَدَةً مِنْهُ عَلَى رَكْعَتَيْنِ قَبْلَ الصُّبْحِ ‏.‏
A'isha reported that the Apostle (ﷺ) was not so much particular about observing supererogatory rak'ahs as in case of the two rak'ahs of the dawn prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।