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सहीह मुस्लिम

नंबर 1685

नंबर 1685किताब 6, नंबर 115अरबी नंबरिंग 724.05
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَنْصَارِيِّ، سَمِعَ عَمْرَةَ بِنْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا طَلَعَ الْفَجْرُ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ أَقُولُ هَلْ يَقْرَأُ فِيهِمَا بِفَاتِحَةِ الْكِتَابِ ‏.‏
A'isha reported:When it was dawn, the Messenger of Allah (ﷺ) observed two rak'ahs, and I would say: Does he recite only the opening chapter of the Qur'an in it?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।